शेर "कुछ बे-सर पैर"
इन्हे शेर कहना मुझे भी गवारा न हैं , चलिए तुकबंदी ही मान लीजिए।
चलिए तुकबंदी न सही , बुरा न मानियेगा , होली तो है ही।
For the rabbles of AAP
सुना था कहीं , आ रहा हैं अख़लाक़ का ग़दर शरिया बरसेंसगी , जा रहा हैं मगरूर सा बदर देख रहा हुँ, अभी कम -ख्याली का नया सहर खाकसार का क्या, वो तो दर बदर दर बदर
For our Esteemed Politicians
मय्यत पे भी मुस्कुराते हैं , तहज़ीब को भी शरमाते है
कौम- इ- हुकुमरान मेरे , इन्शानियत को भी डरवाते हैं।
हालत-इ-बदहवासी देख आप यो न घबराइये
रसूक मेरे सियासतदानो का जो गौर फरमाइये
Seems apt for me
शिकवा नहीं ज़माने सॆ , हमें तो लुटा यारों ने
तूफाँ में भी ख़ड़े रहे , उखड गए बयारों में।
Totally unfit for Bhakts
मंज़िले बनी रहे जो रह जाए थोड़े फासले
रंजिशें मिटती रहे औ न टूटे हमारे काफ़िले